माही के तट पर अखंड साधना व तप के जरिये छोड़ी है छाप…

wagad darshan

मनीष कलाल, डूंगरपुर। वागड़ की यह धरती गोविंद गुरु, संत सुरमालदास महाराज के साथ अनेक साधु संतो की तपस्या स्थली रही है। यहां साधुओं ने तप के जरिये अनूठी छाप छोड़ी है। आज इन साधुओं को बड़ी श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। इसलिए इन्हें लोक देवता भी कहते हैं। लोक देवताओं ने लोक मंगल के कार्यो के जरिये घर घर में प्रात: स्मरणीय स्थान बनाया है। उन्हीं में से एक समाधिस्थ ज्योतिसर महाराज।

इनके राजस्थान के साथ ही गुजरात व मध्यप्रदेश में हजारों की संख्या में भक्त हैं। महाराज ने कई वर्षो तक अखंड़ स्थान की। पीड़ितों की निस्वार्थ सेवा की। इससे यह लोकदेवता के रूप में पहचाने गए। डूंगरपुर जिले के अंतिम छोर व गुजरात से सटे स्थित शिशोट ग्राम पंचायत का दादपुरी पवित्र कुंवारी धाम आदिवासियों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। ज्योतिसर महाराज की समाधि के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। । यहां लगने वाले मेले के आयोजन को लेकर तीन राज्यों के जनजाति गांवों में नौ दिनों तक यात्रा करते हैं।

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यहां लिए जाते हैं संकल्प
धाम के समाधिस्थ महाराज ज्योतिसर के हजारों भक्त है, जो इनके नाम से गुजरात, मध्यप्रदेश के कई जनजाति स्थानों पर जनजागृति की ज्योत जगा रहे हैं। वर्तमान में वाल्मिक महाराज के सानिध्य में धाम पर विभिन्न अनुष्ठान होते हैं। यहां हर रोज बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। धाम पर प्रतिमाओं के सम्मुख नशाखोरी से दूर रहने का संकल्प लिया जाता है। सामाजिक समरसता व जनजागृति के लिए कार्य हो रहा है। धाम परिसर में जाते ही विशाल मुख्य द्वार है जो दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है

यहां पर स्थित है धाम
चीखली पंचायत समिति मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर दक्षिण में दाद सलाखड़ी गांव में माही नदी तट पर धाम स्थित है। परिसर में महाराज ज्योतिसर की समाधि है। इसकी पूजा आराधना कर श्रद्धालु मनोकामनाएं धारण करते हैं। यहां भारत माता, इंद्र भगवान की गादी स्थापित है। महादेव, हनुमान, रामदेव महाराज की प्रतिमाएं स्थापित है। धनतेरस, काली चौदस, माही पूनम एवं चैत्रीय पूनम को दर्शनार्थियों का खासा जमावड़ा रहता है।

यहां प्रतिमाओं के सम्मुख नहीं चढ़ता है पैसा
इस धाम की खासियत है कि मंदिर या किसी भी प्रतिमा पर पैसा नही चढ़ता है। दर्शन के लिए हमेशा द्वार खुले रहते है। धाम परिसर में पूर्णिमा पर महिलाएं, पुरुष समेत अन्य भी सफेद वेषभूषा में नजर आएंगे। धाम में स्थित पेड़ की पूजा होती है। वन व पेड-पौधों को जीवन का पहला व अहम हिस्सा बताते हुए श्रद्धालु पूजा करते हैं। यहां भोजन के​ लिए बर्तन भी भक्त अपने साथ घरों से लेकर आते हैं।

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