सलीम और अनारकलीः प्रेम की ऐसी दर्द भरी कहानी, जिसका अंत बेहद खतरनाक

इस प्रेम कहानी में जिस खूबसूरती से प्यार सजा हुआ है उससे भी ज्यादा ये कहानी एक खतरनाक दर्द भरी दांस्तां हैं। इस पूरी कहानी में सच्चा प्यार भी है और मौत भी। अनारकली को पाने के लिए शहजादे सलीम ने अकबर से युद्ध तक किया जिसमें शिकस्त का सामना करना पड़ा। अकबर ने यह शर्त रखी थी कि या तो सलीम अनारकली को उन्हें सौंप दे या फिर खुद मौत को गले लगा ले। सलीम ने अनारकली से दूर होने के बजाय मौत के मुंह में जाना बेहतर समझा, लेकिन आखिरी समय में अनारकली ने आकर सलीम की जान बचा ली और खुद को बादशाह अकबर के हवाले कर दिया। अकबर ने उसे दीवार में चुनवा दिया।

मुगल बादशाह अकबर की पत्नी मरियम-ऊस-ज़मानी को एक बेटा हुआ। जिसका नाम सलीम (बाद में जहांगीर) रखा गया। कहा जाता है कि वह एक अय्य़ाश राजकुमार था। जिस वजह से अकर ने उसे चौदह वर्ष के लिए राज्य से दूर भेज दिया ताकि वह अनुशासन सीख सके। एक दिन अकबर के यहां एक उत्सव था। उसी उत्सव में आने के लिए अकबर ने सलीम को आने की अनुमति दे दी।

दरबार लगा हुआ था और मुजरा शुरु होने वाला था। जैसे ही मुजरा करने वाली नदिरा (अनारकली) दरबार में आई। सलीम उसको पहली नजर में ही दिल दे बैठा। सलीम ही नहीं बल्कि अनारकली भी उसके प्यार में गिरफ्तार हो गई। अनारकली बहुत खूबसूरत थी। दोनों अपने प्यार में डूब गए पर बादशाह अकबर उनसे गुस्सा थे। कहते हैं कि अकबर खुद अनारकली को चाहते था। सलीम से उसकी शादी हो ऐसा अकबर को मंजूर नहीं था।

सलीम को खूब समझाया, फिर धमकाया पर वह नहीं माना। सलीम को राज्य का बादशाह बनना था पर उसने अपने प्यार को खोकर ये मंजूर नहीं था। अकबर ने उन दोनों पर जुल्म करना शुरु कर दिया। खासकर वह सलीम पर ज्यादा क्रुरता से पेश आने लगा। फिर भी सलीम और अनारकली अपने प्यार में डूबे रहे। अकबर ने अनारकली की गिरफ्तारी के आदेश दिए और उसे लाहौर में जेल की काल कोठरी में रखा गया।

सलीम ने अपने साथियों की मदद से अनारकली को छुड़वा लिया। जब अकबर के जुल्म ज्यादा बढ़ गए तो सलीम ने विद्रोह कर दिया। पर युद्ध में वह अकबर से हार गया। अकबर ने सलीम के सामने दो शर्तें रखी। पहली कि वो अनारकली को अकबर को सौंप दें या फिर मरने के लिए तैयार हो जाए। पर प्यार में गिरफ्त सलीम ने अपने प्यार का साथ नहीं छोड़ा। वह मौत को गले लगाने को तैयार था। पर तभी बीच में अनारकली आ गई और उसने खुद को अकबर के हवाले कर दिया। अकबर ने सलीम को दिवार में चुना दिया। सलीम ने वहीं दम तोड़ दिया।

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