मशीनों से नहीं, बैलों से होती है धान फसल की मढ़ाई

dungarpur

राजेश पटेल। तकनीकी युग में मशीनरी का प्रयोग हो रहा है, लेकिन बैल व बैलगाडी किसान की खेती का पहिया है। जब तक किसान खेती के लिए बैल व बैलगाडी का प्रयोग नहीं करता है। उसे खेती में अपनत्व का अहसास नहीं होता है। खेती का कार्य अधूरा—अधूरा सा लगता है। कई किसान कृषि की पुरातन परंपराओं को सहेजे रखने के लिए बैल व बैलगाडी को अधिक तवज्जो देते हैं। धान की मढाई का मजा बैलो के साथ ही है। धान के पौधों से चावल अलग करने के लिए बैलों की…

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मौत पर मुआवजा का खेल, यहां घर में रख दी जाती है लाश..

moutana tribal area

उदयपुर। अरावली की पहाड़ियों में बसे डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर जिले समेत जनजाति अंचल में मौताणा की गूंज सुनने को मिलती है। मौताणा प्रथा आदिवासियों का अपना कानून है। यहां किसी व्यक्ति की मौत होने पर जिम्मेदार लोगों से राशि वसूली जाती है। यह राशि लाखों में होती है। शव को जिम्मेदार व्यक्ति के घर—आंगन में रख जाता है। जब तक राशि वसूली नहीं की जाती है, तब तक शव को आंगन से उठाया नहीं जाता है। कभी कभी चार से पांच दिन तक शव रखा रहता है। मौताणा तय होने…

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स्टैच्यू आॅफ यूनिटी के लिए ऐसे मिला था मुस्कुराता चेहरा

स्टैच्यू आॅफ यूनिटी पर देश के साथ विश्व की नजर रही। गुजरात में स्थापित दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा हर किसी का आकर्षण रही। भारत ने प्रतिमा निर्माण का रिकार्ड अपने नाम कर लिया है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस प्रतिमा का निर्माण व डिजाइन इतना आसान नहीं था। इसके लिए सरदार वल्लभभाई पटेल के ढाई हजार फोटो एकत्रित किए गए। गुजरात प्रदेश व अन्य कई संस्थाओं की मदद से फोटो को शामिल किया गया। फिर लौह पुरूष का मुस्कुराता चेहरा चयनित हुआ। भारत के ए​कीकरण में इनके…

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