डर, उदासी, विरक्ति और चांद…

डायरी / कुमार अजय रात के दस बजने को है। कांकाणी का वही ढाबा है, पंकज उधास की गजलें सुनकर लौटते हुए जहां कभी कढ़ी-सोगरे का स्वाद चखा था। कढी के साथ सेव-टमाटर, छौंकी हुई हरी मिर्च और दही डालकर चूरी हुई बाजरी की रोटी में जब ढाबे वाला लड़का देसी घी की ‘मिरकली’ डालता है तो दिल चाहकर भी मना नहीं कर पाता जबकि आम दिनों में तो घी लगभग वर्जित ही है। मोटापा, बीपी, डायबिटीज और जाने क्या-क्या डर। डर अपनी जगह झूठे भी नहीं। लेकिन कभी-कभी सारे…

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अच्छा, तो इस तरह बनता है मिट्टी का दीपक…

दीये बनाने की तैयारी में जुटा कुंभकार

इस दीपावली पर मिट्टी के दीपकों से घर को रोशन करने का संकल्प लें। ​एक कुंभकार दीपको को किस तरह से तैयार करता है। आप यहां देख सकते हैं। आप सभी की उम्मीदों पर ही यह दीपक तैयार करने का कार्य करता है। मिट्टी के दीपक हमारी संस्कृति का हिस्सा है। आप सभी इस बार मिट्टी के दीपक का ही प्रयोग करें। देखे कैसे बनते मिट्टी के दीपक। जाने, वागड़ के काला बादल को। क्लिक करें  https://bit.ly/2CTqr5t

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दारू दुकड़ा आलवा वारा, लोकतंत्र ना हैं इ हत्यारा।

बांसवाड़ा। गुजराती में ‘जो बका’ के संबोधन की तरह वागड़ी में ‘ए…हामरो’ (ए सुनो) संबोधन प्रसिद्ध है। इस टेगलाईन को ​बांसवाड़ा निर्वाचन विभाग ने अपनाया है। इनका यह नवाचार बिल्कुल हटकर है। राजनेताओं के हाइटेक चुनाव प्रचार के बीच बांसवाड़ा निर्वाचन विभाग की मतदाता अपील पर हर किसी की नजर जा रही है, कारण मतदाता अपील का अनूठा तरीका । ए…हामरो’…की यह स्टीकर श्रृंखला भावनात्मक अपील के रूप में मतदाता को मतदान से जोड़ने के लिए सटीक है। इसकी चर्चा भी हर जगह हो रही है। वहीं निर्वाचन विभाग भी…

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