भले ही अकाल पड़ जाए, फिर भी बहता रहेगा यहां पानी…

राजेश पटेल, डूंगरपुर। जिले में एक मंदिर ऐसा भी हैं जिसके लिए ​कहा जाता है कि ज्यों ज्यो यात्री बढ़ते जाए। त्यों त्यों पानी बढ़ता जाए। यहां पिछले 500 वर्षो से पानी पहाड़ों से लगातार बहता हुआ आ रहा है। चाहे अकाल पड़ जाए, पानी की कमी आ जाए, लेकिन यहां पानी हमेशा बहता हुआ मिलेगा। बुजुर्ग कहते हैं कि यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ पानी का स्तर बढ़ता हुआ महसूस किया गया है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह मंदिर अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के मध्य गोद में बसा है, जिसे नागफणी मंदिर कहा जाता है।

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यह बिछीवाड़ा क्षेत्र के मोदर गांव में स्थि​त हैं। पहाड़ियों के गुमावदार रास्ते से होते हुए यहां पहुंचा जाता है। यहां जैन धर्म का अतिशयकारी पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। यहां प्रत्येक पूर्णिमा और रविवार को देश के वि​भिन्न हिस्सों से लोग चमत्का​री प्रतिमा के दर्शन के लिए आते हैं। हर वर्ष पैदल यात्रियों का जत्था यहां मनोकामना के साथ पहुंचता हैं। यहां पर भगवान के दर्शन करने के बाद असीम शांति एवं सुकून का अनुभव होता है।

ऐसे पहुंच सकते हैं यहां
डूंगरपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी पर नागफणी मंदिर स्थित है। बिछीवाड़ा क्षेत्र के चुंडावाड़ा गांव से होते हुए पहाडियों के गुमावदार रास्ते से यहां पहुंच सकते हैं। नेशनल हाईवे नंबर आठ पर उदयपुर—अहमदाबाद मार्ग के मध्य राजस्थान सीमा के बिछीवाड़ा गांव से आठ किलोमीटर की दूरी पर है। यह मंदिर मोदर गांव में स्थित हैं।

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सात फन वाली भगवान की प्रतिमा
यहां मूल रूप से पद्मावती माता की प्रतिमा है। माताजी के मस्तक पर भगवान पाश्र्वनाथ विराजमान है। सिर पर सात फण होने के कारण नागफणी मंदिर कहा जाता है। धरणेंद्र ललिता आसन में विराजमान है। दाएं हाथ में भुजबंद, गले में रत्न हार व धोती की चुनरी मनोहारी है। प्रतिमा श्याम वर्ण की है।

 

चढाया जाता है फसल का पहला अनाज
पहाड़ियों के बीच मौजूद मंदिर के आसपास आदिवासी समाज व अन्य समाज के लोग रहते है। कहते हैं कि यहां दर्शन करने के बाद मांगलिक कार्य करते हैं। फसल पैदावार का पहला अनाज इस मंदिर में चढ़ाया जाता है, इसके बाद इसे बाजार में बेचा जाता है व अन्य कार्य किया जाता है। पहाड़ियों के बीच होने के कारण कई बार बड़ी संख्या में आसपास बंदर नजर आते हैं।

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