सात बैलगाडी टूटी, फिर स्थापित कर दी प्रतिमा

डूंगरपुर जिले का प्रसिद्ध मांडविया हनुमान मंदिर

राजेश पटेल व विशाल कलाल की संयुक्त रिपोर्ट : डूंगरपुर जिले का चमत्कारिक मांडविया हनुमान मंदिर आस्था का ऐसा परम धाम है, यहां भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होती है। जिला मुख्यालय से 26 किमी की दूरी पर स्थित इस मंदिर में हर शनिवार को श्रद्धालुओं का मेला लगता है। सिर्फ डूंगरपुर—बांसवाड़ा ही नहीं, विभिन्न स्थानों से लोग दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी किवदंती यह है कि देवली माता टेम्बा के पास किसी आदिवासी समाज के व्यक्ति को स्वप्न आया। घटिया घरा स्थित क्षेत्र में हनुमानजी…

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एक हजार वर्ष पुरानी है मोड़ी माता की प्रतिमा

विशाल कलाल। वागड़ में ऐसे मंदिर व प्रतिमाएं है जो अब तक गुमनानी में है। जिनके बारे में श्रद्धालु अब तक अनभिज्ञ है। जो एक हजार वर्ष से अधिक पुराना है। बहुत कम लोग ही इन चमत्कारिक प्रतिमाओं के बारे में जानते हैं। डूंगरपुर में आंतरी—सुराता मार्ग पर स्थित मोडी माता का मंदिर भी कुछ ऐसा ही है। जहां दर्शन करने से असाध्य बीमारियां दूर हो जाती है। लोगों के संकट टल जाते है। इस प्रतिमा के चौखट तक पहुंचने पर हर समस्या का समाधान निकलने की बात बुजुर्ग बताते…

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जहां मिली थी ईंट, अब बन रहा हनुमानजी का मंदिर

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विशाल कलाल की नजर से : कहते हैं कि ईश्वर कण कण में विराजमान है। निश्चल भाव से बस तलाशने की जरूरत है। आपकी भक्ति में कुछ बात है, भक्त का भगवान से साक्षात्कार हो सकता है। अरावली की इन वादियों में आस्थाएं समायी हुई है। डूंगरपुर जिले का सुराता क्षेत्र घना जंगल है। पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ दिन में सड़कें सुनसान नजर आती है। वैसे यह गांव ग्रीन मार्बल की खानों के लिए जाना जाता है। यहां का मार्बल प्रदेश भर में पहुंचता है। यहां बड़े बड़े पत्थरों के…

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जब मुहम्मद गजनवी ने किया आक्रमण, तो बना वागड़ का यह मंंदिर

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डूंगरपुर। वागड़ के शिवालयों की कलात्मकता इतनी अद्भूत है कि देख कर ही अचरज में पड़ जाते है। आखिर इस ​मंदिर को बनाया कैसे होगा। डूंगरपुर का देवसोमनाथ शिवालय भी कुछ ऐसा ही है। कहा जाता है कि जब मोहम्मद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया। उस समय सोमपुरा शिल्पकार वहां से विस्थापित होकर गुजरात व राजपुताना के वागड़, मेवाड़ व मारवाड़ में आकर बस गए। वागड़ व मेवाड़ में बसे सोमपुरा शिल्पकारों ने सोमनदी के तट पर अपने आराध्य सोमनाथ महादेव का भव्य शिवालय बनाया। इस…

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आशापुरा माताजी ने चुनी वागड़ की धरा, ऐसे पहुंची यहां प्रतिमा

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महिपालसिंह, डूंगरपुर। वागड़ के प्रसिद्ध शक्ति पीठ निठाउवा गामडी स्थित आशापुरा माताजी मंदिर से भक्तों की अनूठी आस्था है। इस प्रतिमा के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। आज हम आपको वागड़ दर्शन के जरिये आप सभी को आशापुरा माताजी मंदिर के बारे में कुछ रोचक बातें बताने जा रहे है, जो इससे पहले आपको शायद ही पता होगी। यह प्रतिमा देशभर में इस लिए विख्यात हैं क्योंकि यह तारागढ़, दिल्ली, मारवाड़, मंदसौर, सांडलपोर होते हुए वागड़ पहुंची। प्रतिमा स्थापना के लिए वागड़ की धरती चुनी गई। चौहान वंश…

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यहां छलका दूध का कुंभ, ओर बन गया सामौर सेठ का मंदिर

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वागड़ में यहां भगवान विष्णु कहलाते हैं सामौर सेठ… महिपालसिंह, डूंगरपुर। वागड़ में हर गांव का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है। हर गांव में आपको मंदिर मिल जाएंगे, हर मंदिर के पीछे किवंदती मिलती है। तभी वागड़ धर्म की नगरी कहलाती है। इसी वागड़ के डूंगरपुर जिले में एक गांव ऐसा भी हैं जहां भगवान विष्णु की प्रतिमा सामौर सेठ कहलाती हैं। गांव भी सामौर नगरी के नाम से विख्यात है। यह जगह आसपुर पंचायत समिति का खेडासामौर गांव है। किवंदती है कि करीब 700 वर्ष पूर्व इस गांव में…

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भले ही अकाल पड़ जाए, फिर भी बहता रहेगा यहां पानी…

राजेश पटेल, डूंगरपुर। जिले में एक मंदिर ऐसा भी हैं जिसके लिए ​कहा जाता है कि ज्यों ज्यो यात्री बढ़ते जाए। त्यों त्यों पानी बढ़ता जाए। यहां पिछले 500 वर्षो से पानी पहाड़ों से लगातार बहता हुआ आ रहा है। चाहे अकाल पड़ जाए, पानी की कमी आ जाए, लेकिन यहां पानी हमेशा बहता हुआ मिलेगा। बुजुर्ग कहते हैं कि यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ पानी का स्तर बढ़ता हुआ महसूस किया गया है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह मंदिर अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के मध्य…

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माही के तट पर अखंड साधना व तप के जरिये छोड़ी है छाप…

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मनीष कलाल, डूंगरपुर। वागड़ की यह धरती गोविंद गुरु, संत सुरमालदास महाराज के साथ अनेक साधु संतो की तपस्या स्थली रही है। यहां साधुओं ने तप के जरिये अनूठी छाप छोड़ी है। आज इन साधुओं को बड़ी श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। इसलिए इन्हें लोक देवता भी कहते हैं। लोक देवताओं ने लोक मंगल के कार्यो के जरिये घर घर में प्रात: स्मरणीय स्थान बनाया है। उन्हीं में से एक समाधिस्थ ज्योतिसर महाराज। इनके राजस्थान के साथ ही गुजरात व मध्यप्रदेश में हजारों की संख्या में भक्त हैं।…

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वागड़ के इस मंदिर में बिना ब्याज के मिलता था पैसा..

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आज हम आपको ऐसे वागड़ क्षेत्र के ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं कि जिसे भगवान गणेशजी संकटमोचन बनकर भक्तों की आर्थिक परेशानियां दूर करते थे। बस इसके लिए आपको भगवान के नाम चिट्ठी लिखनी होती थी। दूसरे दिन नियत समय पर लाल थैली में राशि मिल जाती थी। चाहे कितनी ही राशि क्यों ना हो। यह राशि बिना ब्याज के मिलती थी। राशि को नियत समय पर लौटाने का भी जिक्र चिट्ठी में लिखना होता था। इसके लिए गवाह की जरूरत भी नहीं होती थी। जहां बिना…

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ऐसे डूब गया वागड़ का यह सूर्यमुखी मंदिर…

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मनीष कलाल। वागड़ में शिवालयों का खजाना है। हर शिवालय की अपनी एक कहानी है। इन​ शिवालयों के प्रति लोगों में अगाध आस्था है। वागड़ में एक मंदिर ऐसा भी है जो पानी के मध्य स्थित है। जानकार बताते हैं कि यह मंदिर आठ माह पानी में डूबा रहता है। चार माह ही लोग पानी के तट तक पहुंच पाते हैं। यहां लोग नाव के जरिये दर्शन करने आते हैं। बासंवाड़ा—डूंगरपुर जिले की सीमा पर लगते चीखली—आनंदपुरी के मध्य बेडूवा गांव के पास यह मंदिर मौजूद है। अनास व माही…

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