वागड़ में चित्रकारी की उस्ताद जान्हवी, पंख व माचिस पर बनाती है आकृति

डूंगरपुर। डिजिटल इंडिया के इस दौर में क्रिएटिविटी को तवज्जों मिलती है। कुछ लोगों ने ऐसे क्रिएटिव कार्य किए, जिससे हर कोई अचरच में पड़ जाते हैं। डूंगरपुर शहर के प्रतापनगर में रहने वाली जाह्नवी पंचाल ने ​क्रिएटिविटी के इस दौर में अपनी पहचान बना रही है। अब इनके रचनात्मक कार्यो को सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है। हैंड मेड क्राफ्ट में इनकी माहिरी को देखकर सोशल मीडिया के जरिये आर्डर मिल रहे है। यह माचिस की डिब्बी हो या पत्थर, पंख हो गया बादाम। इन पर बारीकी से…

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इजरायल की नौकरी छोड़ घर लौटे, ओर अब बनाई अपनी पहचान…

shimla mirch

राजेश पटेल, डूंगरपुर। वागड़ से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में रोजगार के लिए जाते हैं। वागड़ का एक व्यक्ति बेहतर रोजगार व कमाने के लिए इजरायल देश गया। वहां नौकरी कर रोजगार से जुड़ गया। नौकरी करने के दौरान देखा कि यहां किसान जैविक खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं, इसकी मांग भी अधिक है। तो उन्होंने अपने देश की माटी में आधुनि​क तरीके से खेती करने की ठानी। पहले नुकसान भी झेला, लेकिन अब कृषि कार्य के जरिये मिसाल कायम कर रहे हैं। अन्य किसान उनसे…

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ओह माय गॉड…डूंगरपुर में एचआईवी से हर चौथे दिन एक की मौत

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डूंगरपुर। जनजाति बहुल डूंगरपुर जिले में एचआईवी हर दिन अपने पांव पसार रहा है। एचआईवी में जिला अति संवेदनशील माना जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इन पर नियंत्रण के लिए अब तक लाखों करोड़ों रुपये खर्चं कर दिए है, लेकिन नियंत्रण के कार्य सिर्फ कागजों में होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में उद्देश्य ही पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। एचआईवी से जिले में हर चौथे दिन एक व्यक्ति की मौत हो रही है। एआरटी सेंटर बनने के बाद अब तक 352 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदेश सरकार ने इस…

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डिजिटल से कदमताल में पीछे डूंगरपुर के नेताजी…

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डूंगरपुर। वर्तमान समय सोशल मीडिया का है। राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया के जरिये अपनी बात पहुंचा रहे हैं। पीएम-सीएम भी सोशल मीडिया का अपनी बात पहुंचाने के लिए हथियार के रूप में उपयोग कर रहे हैं। युवा वर्ग सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय है, ऐसे में जिले के नेता भी सोशल मीडिया के जरिये अपनी उपस्थित दर्ज करा रहे हैं, लेकिन वह सिर्फ गिनती में है। भाजपा-कांग्रेस के अधिकतर जनप्रतिनिधि निष्क्रिय बने हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद व विधायकों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने…

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पीएम एक्सीलेंस के बाद डूंगरपुर की दुर्गा एनर्जी ने जीता रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया अवार्ड…

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ग्रेटर नोएडा। वागड़ की वनिताओं के हुनर व जज्बे ने फिर डूंगरपुर का गौरव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवार्ड के साथ ही अनेकों अवार्ड जीतकर भारत में अनूठी पहचान बना चुका डूंगरपुर में स्थापित दुर्गा एनर्जी ने फिर राजस्थान को अलग पहचान दिलाने का काम किया है। देश की प्रथम जनजाति महिलाओं के स्वामित्व वाली एवं उन्ही के द्वारा संचालित सोलर पैनल विनिर्माण इकाई दुर्गा एनर्जी (डूंगरपुर रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड) ने ग्रेटर नोएडा में 17 सितंबर को रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया अवार्ड्स-2018 में आरई (रिन्यूएबल एनर्जी) के स्टार्टअप वर्ग…

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मोदी के गुजरात से वागड़ की म​हिला किसान को मिला ऐसा आइडिया, अब कमा रही हर माह 50 हजार रुपये

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राजेश पटेल, डूंगरपुर। सचिन ने क्रिकेट में कमाल कर दिया। गीता फोगाट—बबीता फोगाट ने पहलवानी में दमखम दिखा कर पहचान बनाई। वहीं डूंगरपुर जिले की शांता पटेल ने खेती के साथ पशुपालन को आजीविका बनाकर अपनी अपने परिवार की तकदीर बदलने का काम किया है। अब गांव समेत क्षेत्र में इन्हें हर कोई जानने लगा है। यह हर माह करीब 50 से 60 हजार रुपये कमा रही है। जिले के ओडा छोटा गांव की महिला किसान ने गुजरात की तर्ज पर कार्य शुरू किया। अब आय दुगुनी होने के साथ…

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उदयपुर घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले पढ़ें ये काम की बातें

उदयपुर दुनिया के खूबसूरत शहरों में शुमार है। साल भर यहां पर पर्यटकों की आवक लगी ही रहती है। कुछ लोग यहां की खूबसूरती को देखने खिंचे चले आते हैं कुछ यहां ऐतिहासिक महत्व की चीजें देखने आते हैं। यहां पर आने का मन बना रहे हैं तो कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें जान लेंगे तो आपको सुविधा होगी। कैसे पहुंचे हवाई मार्गः उदयपुर आने वालों के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट डबोक एयरपोर्ट है। यह शहर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जयपुर, मुंबई और दिल्ली से…

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चूरू: कैसे पहुंचे सालासर धाम

राजस्‍थान के चुरू ज‌िले में हनुमान जी का एक प्रस‌िद्ध मंद‌िर है| जो सालासर बालाजी के नाम से जाने जाते हैं। यह जयपुर – बीकानेर राजमार्ग पर सीकर से लगभग 57 की दूर पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए जयपुर व सीकर से परिवहन साधन उपलब्ध है। बालाजी के प्रकट होने की कथा ज‌ितनी चमत्कारी है। उतना ही बालाजी भी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है। इस धाम के बारे में यह प्रसिद्व है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। सालासर बालाजी भगवान हनुमान के…

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उदयपुरः जानिए कैसे बसा था ये खूबसूरत शहर, चित्तौड़ की जगह क्यों बनाया राजधानी

राजस्थान का उदयपुर शहर झीलों की नगरी के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उदयपुर सिसोदिया राजवंश की राजधानी रहा है। इसे 1559ई में महाराणा उदयसिंह ने बसाया था। उदयपुर में कई झीलें हैं, जो इस शहर की खूबसूरती को और बढ़ा देती है। उदयपुर घूमने आए तो यहां की खूबसूरती आपको मोहित कर देती। वहीं यहां का गौरवशाली इतिहास वीरों की असंख्य गाथाओं से भरा पड़ा है। उदयपुर कैसे बसा?  सिसोदिया राजपूतों ने मेवाड़ की राजधानी के रूप में चित्तौड़गढ़ को चुना। इसीलिए इतिहास में चित्तौड़ का नाम…

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सुन्दर महल, ऊंट की सवारी, वीर किवदंतियां से लेकर रोमांटिक कहानियां सब कुछ

जब हम राजस्थान की बात करते हैं तो आपके जहन में क्या आता है ? सुन्दर महल, ऊंट की राजसी सवारी ? वीर किवदंतियां रोमांटिक कहानियाँ, जीवंत संस्कृति और आकर्षक विरासत? क्या यहां बताई गयी बातों में सिमट गया है राजस्थान शायद आप हां कहें । चाहिए कोई बात नहीं “राजाओं की भूमि” इससे कहीं अधिक है इससे कहीं विस्तृत है। राजस्थान, एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर राज्य भारत के उत्तर पश्चिम में मौजूद है जो अपने आप में कालातीत आश्चर्य का जीवंत उदहारण है, अगर व्यक्ति यात्रा का पारखी…

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