जीवन के देखे 70 बसंत, इच्छा हैं कि बस एक बार ओर टिकट मिल जाए…

wagad chourasi shankarlal ahari

डूंगरपुर। मैं 70 बसंत देख चुका हूं। राजनीति में काफी बदलाव देखने को मिले। सबकी सुनी। वह दौर था जब राजनीति सेवा हुआ करती थी। सेवा की दृष्टि से लोग राजनीति में प्रवेश करते थे। अब सिर्फ स्टैंडर्ड, लाभ प्राप्त करने, सुख सुविधा के लिए चुनाव लड़े जाते हैं। 1985 से वर्ष 2013 तक चार बार चौरासी से विधायक रह चुका हूं। टिकट की दौड़ में अभी कई लोग हैं, लेकिन इच्छा है कि एक बार टिकट मिल जाए। अंतिम बार चौरासी विधानसभा क्षेत्र की जनता को सेवा ही राजनीति…यह बताना चाहता हूं। यह कहना है पूर्व विधायक शंकरलाल अहारी का। यह चारवाड़ा ग्राम पंचायत के मोरडूंगरा गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं।

wagad chourasi shankarlal ahari

यह कहते हैं कि वर्ष 1985 में पहली बार विधानसभा में गया। हर बार विधानसभा में नया अनुभव मिला। मेरे दोनों बेटों ने कभी राजनीति में आने की इच्छा नहीं जताई। बस खेती बाड़ी व अपने काम में मस्त रहे। विधायक रहने के दौरान भी मैंने उन्हें राजनीति से दूर रखा। चार बार विधायक रहने के दौरान क्षेत्र की जनता का इतना भरपूर प्यार मिला। लोगों के दु:ख दर्द दूर किए। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद पहली बार चुनाव लड़ने पर लोगों ने बहुत प्यार दिया। 1985 के दौर में पैदल भी चलना पड़ा। आज सब बदल गया, पैसे के बगैर कुछ काम नहीं चलता है।

बड़े भाई नहीं चाहते थे कि चुनाव लडूं
अहारी कहते हैं कि जब चौथी बार विधायक के लिए दावेदारी की तो बड़े भाई पूंजाभाई गमेती नहीं चाहते थे कि मैं चुनाव लडूं। अब वह इस दूनिया में नहीं रहे। वह कहते थे कि राजनीति में अब वह बात नहीं रही। यहां सेवा का उद्देश्य नहीं रहा। तब मैंने कहा कि भले ही कुछ भी हो, मेरा अंतिम उद्देश्य सेवा ही रहेगा। हमेशा भाईचारा कायम किया। लड़ाई झगड़ा से दूर रहकर सबकी सुनता गया, आगे कदम बढ़ाता चला। मेरे पास सिर्फ एक चौ​पहिया वाहन है।

क्या है मेरे पास सब जानते हैं…
जब उनसे बैंक बेलैंस को लेकर सवाल किए तो कहते हैं कि मेरे पास क्या है, यह सब जानते है। मुझसे ज्यादा क्षेत्र की जनता को पता हैं। पुत्र को राजनीति में नहीं लाने के सवाल पर कहते हैं कि भाई भतीजावाद नहीं चाहता हूं। बस सेवा ही मेरा मकसद था। मैं यह नहीं चाहता हूं कि लोग कहें कि मैंने अपने पुत्र को राजनीति से जोड़ दिया। राजनीति कोई व्यवसाय नहीं हैं। भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। आजादी के डेढ़ माह बाद इनका जन्म हुआ। यह कहते हैं कि राजनीति सिर्फ जनहित के लिए होनी चाहिए। जनहित व सेवा ही राजनीति है।

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