ऐसे डूब गया वागड़ का यह सूर्यमुखी मंदिर…

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मनीष कलाल वागड़ में शिवालयों का खजाना है। हर शिवालय की अपनी एक कहानी है। इन​ शिवालयों के प्रति लोगों में अगाध आस्था है। वागड़ में एक मंदिर ऐसा भी है जो पानी के मध्य स्थित है। जानकार बताते हैं कि यह मंदिर आठ माह पानी में डूबा रहता है। चार माह ही लोग पानी के तट तक पहुंच पाते हैं। यहां लोग नाव के जरिये दर्शन करने आते हैं। बासंवाड़ा—डूंगरपुर जिले की सीमा पर लगते चीखली—आनंदपुरी के मध्य बेडूवा गांव के पास यह मंदिर मौजूद है। अनास व माही नंदी के संगम पर होने के कारण इसे संगमेश्वर महादेव के नाम से पहचाना जाता है।

बताते हैं कि वर्ष 1970 में गुजरात सरकार ने जल संरक्षण प्रोजेक्ट के तहत महत्वपूर्ण कडाणा बांध बनाया। यहां अनास व माही नंदी का संगम मिलता है। यहां पानी का जलस्तर गहरा है। वहीं कडाणा बांध से पानी छोड़े जाने पर जलस्तर अधिक देखने को मिलता है। कडाणा बांध के कारण यह संगम स्थल का तीर्थ पानी में डूब गया। ऐसे में अधिकतर श्रद्धालु दूर से मंदिर को देखकर मनोकामना धारण करते हैं।

महादेव का यह सूर्यमुखी मंदिर

महादेव का य​ह मंदिर सूर्यमुखी है। इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है। इस मंदिर पर कलात्मक आकृतियां नजर आती है। संगमेश्वर मंदिर पत्थर व ईंट का बना हुआ है। यहां साधुओ की समाधियां भी बनी हुई है। यहां पर अन्य कई मंदिर थे, जो वर्ष भर पानी में डूबे रहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए। यहां से बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है।

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बरसों से नाव के जरिये सफर

डूंगरपुर—बांसवाड़ा दोनों जिलों के समीपवर्ती गांव के लोग नाव के ​जरिये ही वर्षो से सफर कर रहे हैं। यहां पानी का नजारा हर किसी को आकर्षित करता है। अब प्रदेश सरकार ने अब दोनों जिलों को आपस में जोड़ने के लिए कोटा की तर्ज पर हैगिंग ब्रिज बनाने की घोषणा की है। इसका मॉडल भी पेश किया। इस पर करीब एक अरब रुपये खर्चं होना बताया जा रहा है। इसका नाम गोविंद गुरु हैंगिंग ब्रिज कहलाएगा। सीएम राजे ने धंबोला में जनसभा के दौरान कहा कि लोग यहां पर घुमने के लिए आएंगे। प्रदेश भर में इसको पहचान मिलेगी।

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