जहां मिली थी ईंट, अब बन रहा हनुमानजी का मंदिर

wagad darshan

विशाल कलाल की नजर से :
कहते हैं कि ईश्वर कण कण में विराजमान है। निश्चल भाव से बस तलाशने की जरूरत है। आपकी भक्ति में कुछ बात है, भक्त का भगवान से साक्षात्कार हो सकता है। अरावली की इन वादियों में आस्थाएं समायी हुई है। डूंगरपुर जिले का सुराता क्षेत्र घना जंगल है। पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ दिन में सड़कें सुनसान नजर आती है। वैसे यह गांव ग्रीन मार्बल की खानों के लिए जाना जाता है। यहां का मार्बल प्रदेश भर में पहुंचता है। यहां बड़े बड़े पत्थरों के बीच एक ईंट का मिलना व ईश्वरीय शक्ति का महसूस होना ही हर किसी को अचरज में डालता है। अब उसी जगह पर 95 वर्षीय गोराजी रोत की निगरानी में हनुमान भगवान के मंदिर का निर्माण पिछले एक वर्ष से किया जा रहा है। सुराता से आंतरी जाने वाले मार्ग यह मंदिर स्थित है।

लोगों का कहना है कि 25 वर्ष पहले गोराजी रोत के परिवार में परेशानी होने पर गुरु के पास गए थे। गुरु ने कहा कि आप राहगीरों के लिए जल सेवा करें। इसके बाद घर से एक किमी दूर पैदल चलकर व सिर पर मटकी रखकर करीब 20 वर्ष तक लोगों को पानी पिलाया। यह इनकी रोजाना के गतिविधि का हिस्सा था। गोराजी कहते हैं कि वह समय था, सड़कें पगडंडी वाली थी, आवाजाही मुश्किल थी। लोगों का आना जाना लगा रहता था। 20 वर्ष तक ही एक ही जगह ही मटकी के साथ बैठता था। उस जगह से लगाव हो गया था। लोग कहते हैं कि उसी जगह पर गोराजी ने कुछ वर्ष पहले पांच फीट खुदाई की थी कि उसी दौरान पत्थरों के बीच एक बड़ी ईंट व चार ईंट के छोटे टूकड़े मिले। यह गांव ऐसा है कि यहां पर ग्रीन मार्बल, सोप स्टोन निकलता है। पत्थरों के बीच ईंट का मिलना ही हर किसी को आश्चर्य चकित कर दिया। ईंट को हाथ में लेते ही ईश्वरीय शक्ति का आभास हुआ। अब वह सिर्फ ईंट नहीं, इनके साथ ही गांव के लोगों के लिए पूजनीय हो गई।

जयराम ने बनाई हनुमान भगवान की प्रतिमा
ईश्वरीय आभास के चलते गांव के जयराम रोत समेत पांच कारीगरों की मदद से हनुमान भगवान की मनोहारी व आकर्षक प्रतिमा को पत्थर पर बनाया गया। इस प्रतिमा को एक बार देखकर आप आश्चर्य चकित रह जाएंगे। वागड़ के गांवों में ऐसे कारीगर है जो प्रतिमा को तैयार कर सकते हैं। गांव के कारीगर भी मूर्तिकला में माहिर है। कहते हैं कि यहां से गुजरने वाले लोग प्रतिमा को देखकर रूक जाते हैं। लोग बताते हैं कि रात के समय मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया।

गांव के सरपंच महिपाल रोत बताते हैं कि यहां मनोकामना पूर्ण हनुमानजी की प्रतिमा विराजमान है। लोगों के मुंह से इनके बारे में सुना है। मंदिर का निर्माण गांव के सरंपच महिपाल रोत स्वयं अपने खर्चं से करा रहे हैं। इस प्रतिमा को बनाने में करीब 25 दिन का समय लगा। अब यहां पर मंदिर निर्माण का कार्य हो रहा है।

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