क्या आप जानते है वागड़ की महिला किसान मॉडल को

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वागड़ की महिला किसान ने दिल्ली में गाया “वडाली तारे खुस जाहे मु नानी परणाई”

राजेश पटेल,डूंगरपुर। किसानों को याद करने के लिए सिर्फ किसान दिवस ही नहीं है। अन्नदाता को याद करने के लिए हर दिन महत्वपूर्ण है। वागड़ ​के किसान खेती में जो नवाचार कर रहे हैं वह काबिले तारीफ है। किसी ने क्या खूब लिखा है, “कर दिखाओ कुछ ऐसा कि दुनिया करना चाहे आपके जैसा ” ऐसा ही कुछ करके दिखाया है वागड़ की शांता पटेल ने। इस महिला किसान को दूरदर्शन चैनल द्वारा राष्ट्रीय महिला ​किसान अवार्ड से नई दिल्ली में सम्मानित किया। इस महिला को कृषि क्षेत्र का दिग्दर्शन कराने के लिए अन्य पुरस्कार भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

मूलतः राजस्थान के डूंगरपुर जिले के माडा टेम्बाफला की रहने वाली शांता ने कृषि क्षेत्र में पांच से छह वर्षो में नवीनतम तकनीक को अपनाकर अपने खेतों पर एक समन्वित कृषि प्रणाली को मॉडल के रूप में स्थापित किया है। इस कारण कृषि विज्ञान केंद्र और दूरदर्शन किसान चैनल ने महिला किसान पुरस्कार के लिए नामित किया है। प्रथम चरण में दूरदर्शन केंद्र जयपुर की टीम द्वारा दो माह पहले माडा गांव में शांता पटेल के खेतो में पहुंचकर कृषि प्रणाली को रिकार्डिंग किया। जिसे 27 से 30 नवंबर तक चैनल पर प्रसारित किया गया। शांता पटेल ने स्वयं आत्मनिर्भर बनकर अन्य किसानों को प्रेरित करने का काम किया है। वागड़ की यह महिला किसान मॉडल के रूप में पहचान बना रही है।

नई दिल्ली में दूरदर्शन केंद्र पर देश की 111 महिला किसानों में से शांता को प्रथम स्थान मिला। सभी किसानों में प्रतियोगिता कराई गई। कृषि से जुड़े प्रश्न पूछे गए। शांता पटेल ने वागड़ी लोक गीत गाया कि “वडाली तारे खुस जाहे मु नानी परणाई” इस गीत के खातिर पटेल को सबसे अधिक अंक मिले। जिसका अनुवाद भी करके बताया गया कि “वागड़ में बाल विवाह पर दुल्हन के द्वारा ये गीत गाया जाता है जिसमें कहा गया है कि मेरी कम उम्र में सगाई करने वाले तेरी कभी औलाद न रहे और परिवार वंश खत्म हो जाये”

शांता पटेल के पास 7.4 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें पांच हेक्टेयर में फसल उत्पादन, दो हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन, 0.4 हेक्टेयर में चारा उत्पादन किया जाता है। सब्जियों की खेती में इंटरक्रॉपिंग पद्धति अपनाई जाती है। शांता पटेल के पति सुरेश पटेल ने बताया कि कृषि में नवीनतम तकनीक अपनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र का सहयोग मिल रहा है। वहां से मिलने वाले प्रशिक्षण व ज्ञान का प्रयोग खेती में अपनाया जा रहा है।

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