दारू दुकड़ा आलवा वारा, लोकतंत्र ना हैं इ हत्यारा।

बांसवाड़ा। गुजराती में ‘जो बका’ के संबोधन की तरह वागड़ी में ‘ए…हामरो’ (ए सुनो) संबोधन प्रसिद्ध है। इस टेगलाईन को ​बांसवाड़ा निर्वाचन विभाग ने अपनाया है। इनका यह नवाचार बिल्कुल हटकर है। राजनेताओं के हाइटेक चुनाव प्रचार के बीच बांसवाड़ा निर्वाचन विभाग की मतदाता अपील पर हर किसी की नजर जा रही है, कारण मतदाता अपील का अनूठा तरीका । ए…हामरो’…की यह स्टीकर श्रृंखला भावनात्मक अपील के रूप में मतदाता को मतदान से जोड़ने के लिए सटीक है। इसकी चर्चा भी हर जगह हो रही है। वहीं निर्वाचन विभाग भी इस स्टीकर श्रृंखला के जरिये मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने में सफलता हासिल कर सकेगा।

प्रदेशभर में मतदाता जागरूकता के लिए बांसवाड़ा निर्वाचन विभाग का प्रयास हटकर नजर आ रहा है। जैसे : आपड़ो वोट, आपकी ताकत….समझी ने आलो, तो ने आवे आफ़त!!, भाई—बेन, काका—काकी, सरकार बणावो, वोट नाकी!!, लाड़ा—लाड़ी जोड़े जाओ! लोकतंत्र नो तैवार मनावो!! दारू दुकड़ा आलवा वारा, लोकतंत्र ना हैं इ हत्यारा। इस श्रृंखला में अब तक आठ स्टीकर जारी हो चुके हैं। प्रतिदिन स्टीकर जारी किए जा रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व ही इसे शुरू किया गया था। इसमें एक कार्टून करेक्टर के जरिये मतदाताओं को संबोधन देते हुए आकर्षक वागड़ी पंक्तियों में संदेश दिए जा रहे हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर) भगवती प्रसाद ने जिले में वागड़ी बोली के प्रभुत्व को देखते हुए वागड़ी बोली मतदाता जागरूकता की पहल पर काम किया। इसके तहत एक सौ से अधिक स्टीकर्स जारी करने के लिए कार्य किया जा रहा है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. भंवरलाल ने बताया कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक कमलेश शर्मा के साथ रंगकर्मी सतीश आचार्य, साहित्यकार दिलीप सोमेश्वर, जलज जानी, भंवरलाल गर्ग, राजेन्द्र जैन आदि के दल ने स्टीकर्स का निर्माण किया है। अब तक इस थीम पर दो दर्जन से अधिक आकर्षक संदेश तैयार किए जा चुके हैं। अब इन संदेशों को सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल किया जा रहा है। इसके आकर्षक पोस्टर, स्टीकर व फ्लेक्स भी प्रिंट करवाने का काम चल रहा है।

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मतदाताओं के लिए मीठी मनुहार
चुनावों में राजनेता मतदाताओं की मीठी बोली व मनुहार के जरिये मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं, वहीं इस बार राजस्थान के बांसवाड़ा जिला निर्वाचन कार्यालय ने लोकतंत्र के उत्सव में नवाचार किया है। यह नवाचार अपने आप में अनूठा इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि इसमें वागड़ी बोली को स्टीकर श्रृंखला में स्थान मिला। डूंगरपुर—बांसवाड़ा जिले के वागड़ क्षेत्र में वागड़ी बोली का अपना अलग अंदाज है। यहां ए हामरो हो के…पक्तियां अक्सर सुनने को मिल जाती है। इन ​पंक्तियों में अपनत्व सा लगता है। हर कोई इससे जुड़ भी जाता है। वैसे भी हिंदी—अंग्रेजी के बीच क्षेत्रीय भाषा अपना खासा महत्व रखती है। वागड़ी बोली का दोनों जिलों में खासा प्रभुत्व है। इसलिए यह स्टीकर श्रृंखला की पंक्तियां उत्सवी माहौल में मतदाता जागरूकता का रंग घोल रही है।

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