मौत पर मुआवजा का खेल, यहां घर में रख दी जाती है लाश..

moutana tribal area

उदयपुर। अरावली की पहाड़ियों में बसे डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर जिले समेत जनजाति अंचल में मौताणा की गूंज सुनने को मिलती है। मौताणा प्रथा आदिवासियों का अपना कानून है। यहां किसी व्यक्ति की मौत होने पर जिम्मेदार लोगों से राशि वसूली जाती है। यह राशि लाखों में होती है। शव को जिम्मेदार व्यक्ति के घर—आंगन में रख जाता है। जब तक राशि वसूली नहीं की जाती है, तब तक शव को आंगन से उठाया नहीं जाता है। कभी कभी चार से पांच दिन तक शव रखा रहता है। मौताणा तय होने के बाद ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई होती है। मौताणा को त्वरित न्याय और राहत का विकल्प मानकर देखा जाता है। मौताणा की यह राशि एक या दो लाख नहीं, पांच लाख व दस लाख रुपये तक तक पहुंची है। सामाजिक न्याय के लिए शुरू की व्यवस्था में कई परिवार तबाह को चुके हैं।

मौताणा की यह प्रथा जनजाति अंचल में बरसों से चली आ रही है। सामाजिक न्याय, महिला सुरक्षा व महिलाओं पर होने वाले अपराध पर अंकुश लगाने के लिए बरसों पहले किए गए प्रयास थे। इससे महिला की सुरक्षा के प्रति समाज व परिवार निश्चिंत रहता है। अपराध करने की सोच रखने वाला अपराध करने से डरता था। अब समय के साथ प्रथा के मायने बदल गए है। अब सड़क दुर्घटना व अन्य मामलों में मौताणा की मांग पर लोग अड़ जाते हैं। कई परिवारों को लाखों रुपये चुकाने के बाद मौताणा का मामला शांत होता है। मजबूरी के चलते भी उधार राशि लाकर संबंधित पक्ष को देनी पड़ती है।

डूंगरपुर—बांसवाड़ा जिले में आए दिन मौताणा की गूंज सुनने को मिलती है। इसमें परिवार को कुसूरवार मानकर राशि तय की जाती है। यह मौत पर मुआवजे का खेल है। न पुलिस का जोर चलता है, ओर न ही प्रशासन का। यहां कानून भी अंधा बन जाता है। हालांकि विपरित परिस्थितियों में प्रशासन को ठोस कदम उठाकर फायरिंग भी करनी पड़ी है। डूंगरपुर जिले की बात करें तो अब तक दो बार फायरिंग की नौबत आ चुकी है।

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कई लोग मौताणा की प्रथा से अनभिज्ञ थे, लेकिन वर्ष 1996 में मौताणा का सबसे चर्चित मामला सामने आया। डूंगरपुर से 15 किमी दूरी विकासनगर में सरपंच रामलाल की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई। आरोपी उपसरपंच को बना दिया। मौताणा की मांग को लेकर शव उपसरपंच के घर आंगन में तीन दिन तक रहा। तनाव के हालात पैदा होने पर पुलिस को फायरिंग का कदम उठाना पड़ा। यहां तक सड़क को भी जाम कर दिया। इस बात को बीस बरस हो गए, लेकिन कई लोगों को फायरिंग का घटनाक्रम जेहन में याद है। मौताणा प्रथा को रोकने के लिए लगातार प्रयास जारी है, लेकिन आए दिन मामले सामने आ रहे है। वहीं प्रसिद्ध टीवी शो में भी मौताणा का एपिसोड दिखाया जा चुका है।

शेष भाग जल्द ही….

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