एक हजार वर्ष पुरानी है मोड़ी माता की प्रतिमा

विशाल कलाल। वागड़ में ऐसे मंदिर व प्रतिमाएं है जो अब तक गुमनानी में है। जिनके बारे में श्रद्धालु अब तक अनभिज्ञ है। जो एक हजार वर्ष से अधिक पुराना है। बहुत कम लोग ही इन चमत्कारिक प्रतिमाओं के बारे में जानते हैं। डूंगरपुर में आंतरी—सुराता मार्ग पर स्थित मोडी माता का मंदिर भी कुछ ऐसा ही है। जहां दर्शन करने से असाध्य बीमारियां दूर हो जाती है। लोगों के संकट टल जाते है। इस प्रतिमा के चौखट तक पहुंचने पर हर समस्या का समाधान निकलने की बात बुजुर्ग बताते आ रहे हैं। इस प्रतिमा के समक्ष कई चमत्कार भी हो चुके हैं। कई वर्षो तक प्रतिमा गुमनामी में पहाड़ों पर रही। वर्षो तक पहाड़ों पर ही प्रतिमा की पूजा अर्चना होती आ रही है।

लोग बताते हैं कि 200 वर्ष पूर्व तक इस प्रतिमा की पूजा भी नहीं होती थी। यह प्रतिमा पहाड़ पर होने के कारण लोग नहीं पहुंच पाते थे। इसके बाद प्रतिमा को पहाड़ से लाकर सड़क के पास स्थापित किया गया। ताकि नियमित पूजा की जा सकें। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन आसान हो जाए। यह मंदिर डूंगरपुर जिले के सुरातापाल गांव की सीमा में आता है। गुमावदार व चारों तरफ जंगल व सुनसान रास्ता नजर आता है। आंतरी गांव से इस मंदिर की दूरी करीब ढाई से तीन किलोमीटर है।

एक हजार वर्ष पुरानी यह प्रतिमा

मंदिर में पुजारी के रूप में काम करने वाले वालेंग भाई बताते हैं कि यहां पर अक्सर गुजरात से लोग दर्शन के लिए आते हैं। इस प्रतिमा का गुजरात से कोई न कोई वास्ता जरूर है। नवरात्र के दिन में गुजरात से लोगों का आना जाना लगा रहता है। मोड़ी माता के नाम से गुजरात में एक जगह भी है। गुजरात के दर्शनार्थी मन्नत धारण करने व छोड़ने के लिए पहुंचते हैंं। इस प्रतिमा की विधिवत पूजा अर्चना के बाद कई चमत्कार देखे हैं। श्रद्धालु बताते हैं कि ​साफ हृदय से मंदिर की चौखट पार करने पर स्वयं परिवर्तन देखोगे।

पहाड़ी व सुनसान रास्ता

मंदिर में सहयोग करने वाले अन्य सदस्य ने बताया कि प्रतिदिन मंदिर में पूजा अर्चना करने से पहले पहाड़ पर पदचिन्ह की पूजा होती है। इसके बाद ही मंदिर में पूजा अर्चना शुरू होती है। बरसों से यही पंरपरा चली आ रही है। बताते हैं कि पहाड़ पर प्रतिमा खुदाई के दौरान मिली थी। तभी से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। यह पहाड़ भी लोगों के लिए पुजनीय हो गया है।

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प्रतिमा काफी पुरानी होने के कारण उसके स्थान पर कुछ वर्ष पूर्व ही नई प्रतिमा स्थापित की गई। नई प्रतिमा को हुबहु पुरानी प्रतिमा के आकार में तैयार किया गया है। शनै: शनै: मंदिर निर्माण का कार्य पिछले पांच वर्ष से चल रहा है। इसके लिए श्री मोड़ी माता मंदिर निर्माण समिति का गठन किया गया है। ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य को गति मिल रही है।

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