पाड़वा गांव 10 वर्ष तक रहा था विधानसभा क्षेत्र

डूंगरपुर। सागवाड़ा शहर से 14 किमी की दूरी पर स्थित पाड़वा गांव कभी जिले ​का विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था। इस बात को 41 वर्ष बीत गए। वह समय था जब पाडवा अपने आप में विधानसभा क्षेत्र था। इस गांव की अपनी राजनीतिक पकड़ थी। आज भी इसकी पकड़ बनी हुई है। कभी स्वयं विधानसभा क्षेत्र क​हलाने वाला यह गांव, आज 14 किमी की दूरी पर स्थित सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बना हुआ है। हालां​कि आसपुर विधानसभा क्षेत्र को समाप्त कर ही इसे मुख्यालय बनाया गया था। यह गांव सागवाड़ा से आसपुर जाने के दौरान मुख्य मार्ग पर स्थित है। इसका पडोसी गांव कतिसौर है।

प्रदेश में पहली बार विधानसभा के चुनाव 1952 में हुए। वर्ष 1957 के चुनाव में चुनाव में आसपुर विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। 10 वर्ष तक व्यवस्था चली। 1967 के चुनाव से पहले विधानसभा क्षेत्र का परिसीमन हुआ। इसमें आसपुर विधानसभा को समाप्त कर पाड़वा को विधानसभा की सौगात मिली। लोगों ने हर्ष जताया। ​उसी समय चौरासी​ विधानसभा क्षेत्र का नामकरण किया गया। नया विधानसभा बना।

पाड़वा विधानसभा ने प्रदेश की विधानसभा को दो बार विधायक दिए। फिर वर्ष 1977 के चुनाव में पाडवा विधानसभा को ​हटा दिया। ओर आसपुर को फिर से विधानसभा क्षेत्र बना दिया। निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन की व्यवस्था 10 वर्ष चली।तब से लेकर अब जिले में सागवाड़ा, आसपुर, डूंगरपुर, चौरासी विधानसभा क्षेत्र के रूप में चार विधानसभा की व्यवस्था चल रही है। पाड़वा विधानसभा क्षेत्र से लगातार 10 वर्ष तक महेंद्र परमार को विधायक के रूप में चुना। व्यवसायिक दृष्टिकोण से गांव की स्थिति काफी अच्छी है। यहां पर पुलिस चौकी भी स्थापित है।

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