स्टैच्यू आॅफ यूनिटी के लिए ऐसे मिला था मुस्कुराता चेहरा

स्टैच्यू आॅफ यूनिटी पर देश के साथ विश्व की नजर रही। गुजरात में स्थापित दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा हर किसी का आकर्षण रही। भारत ने प्रतिमा निर्माण का रिकार्ड अपने नाम कर लिया है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस प्रतिमा का निर्माण व डिजाइन इतना आसान नहीं था। इसके लिए सरदार वल्लभभाई पटेल के ढाई हजार फोटो एकत्रित किए गए। गुजरात प्रदेश व अन्य कई संस्थाओं की मदद से फोटो को शामिल किया गया। फिर लौह पुरूष का मुस्कुराता चेहरा चयनित हुआ।

भारत के ए​कीकरण में इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इसकी डिजाइन तैयार करने वाले 93 वर्षीय राम वनजी सुतार का नाम भी इस प्रतिमा से जुड़ गया है। बचपन में ​मिट्टी के गणेश, दीवारों पर आकृति उकेरने वाले के नाम पर प्रतिमा की डिजाइन तैयार मानों अपने लक्ष्य तक पहुंचने जैसा है। यह मूलरूप से महाराष्ट के रहने वाले हैं, इन्होंने दिल्ली एनसीआर को अपनी कर्मभूमि बनाया है। यह पंडित जवाहरलाल नेहरू व राष्टपिता महात्मा गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं।

यह है खासियत
इस प्रतिमा को भारत के साथ अमेरिका व चीन के शिल्पकार, कारीगर व इंजीनियर के सहयोग से बनाया है। इसको बनाने में 3 वर्ष आठ माह का समय लगा। 220 किमी रफ्तार का तूफान का सामना करने व 6.0 तीव्रता का भुकंप सहने की क्षमता के अनुसार बनाया गया है। यह विश्व की अब तक की सबसे उंची व विशालकाय प्रतिमा है। इसमें 22 हजार टन पीत्तल व 70 हजार टन सीमेंट का प्रयोग किया गया है। इस पर 2989 करोड़ रुपये खर्चं किए गए है।

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