दिवाली पर कैसे चेहरे पर आती है मुस्कुराहट!

वागड़ में मेरियू की परंपरा नववर्ष यानि गोवर्धन पूजा के दिन तड़के पांच बजे से शुरू हो जाती है। यहां बच्चों की तरफ से आल दिवारी, काल दिवारी, पमणे दाड़े घोर दिवारी, मेरियू..मेरियू..मेरियू का संबोधन किया जाता है। इससे आगे की पक्तियां सुनना भी रोचक होता है। बच्चों द्वारा संबोधन के पास मेरियू में तेल पुरवने के साथ सिक्कों का आना ही चेहरे पर मुस्कुराहट ला देता है। आपके लिए हम पुरा वीडियो लेकर आए है।

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आवी गया पामणा, दिवारी आणू हे…

दिवाली आणा की अनूठी परपंरा सिर्फ वागड़ के डूंगरपुर व बांसवाड़ा जिले में देखने को मिलती है। नवदंपत्ति की पारिवारिक जीवन की शुरुआत इस दिन से होती है। यह खास परंपरा नव दम्पति के लिए ही है। इस साल शादी करने वाले पुरुष ससुराल अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ पत्नी को लेने जाता है। यहां सभी का स्वागत व मान मनुहार किया जाता है। मिठाई बांटी जाती है। हंसी—ठिठोली होती है। पटाखे छोड़कर खुशियां मनाई जाती है। उस दौरान दुल्हे को भेंट स्वरूप आभूषण व वस्त्र दिए जाते हैं।…

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यहां पशु भी मनाते हैं दिवाली, होती है दौड़

राजेश पटेल, डूंगरपुर। त्योहारों पर राजस्थान जैसी परंपराएं आपको कहीं पर भी देखने को नहीं मिलेगी। यहां दीपावली पर्व पर पशु भी त्योहारों का हिस्सा बनते हैं। वागड़ के गांव—गांव में पशु दौड़ की परंपरा बरसों से चली आ रहा है। गायों को कच्चों रास्तों व मुख्य मार्ग पर दौड़ाया जाता है। दौड़ में जो पशु सबसे आगे निकलता है, उसके आधार पर वर्ष के सुखमय रहने की भविष्यवाणी की जाती है। छापी गांव के रामेश्वर पाटीदार ने बताया कि जिस रंग की गाय आगे निकलती है उससे नया वर्ष…

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