माही के तट पर अखंड साधना व तप के जरिये छोड़ी है छाप…

wagad darshan

मनीष कलाल, डूंगरपुर। वागड़ की यह धरती गोविंद गुरु, संत सुरमालदास महाराज के साथ अनेक साधु संतो की तपस्या स्थली रही है। यहां साधुओं ने तप के जरिये अनूठी छाप छोड़ी है। आज इन साधुओं को बड़ी श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। इसलिए इन्हें लोक देवता भी कहते हैं। लोक देवताओं ने लोक मंगल के कार्यो के जरिये घर घर में प्रात: स्मरणीय स्थान बनाया है। उन्हीं में से एक समाधिस्थ ज्योतिसर महाराज। इनके राजस्थान के साथ ही गुजरात व मध्यप्रदेश में हजारों की संख्या में भक्त हैं।…

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