नी मल्यो हेड़ों, इतना लंबा है वागड़ का हेड़ा गीत

राजेश पटेल, डूंगरपुर। ‘हेड़ा’ गीत नाम थोड़ा अजीब जरूर है, लेकिन नामकरण के पीछे भी एक तथ्य है। वागड़ में कहते हैं कि हेड़ों नी मल्यो। मतलब जिसका अंतिम छोर नहीं मिलता है। यह गीत ऐसा है कि शुरू होने के बाद इसका अंत नहीं होता है। यह गीत इतना लंबा है कि दो से तीन दिन लगातार गाने के बाद भी खत्म नहीं होता है। इसे वागड़ी बोली में ही गाया जाता है। जनजाति बहुल डूंगरपुर-बांसवाड़ा जिले में कई बुजुर्ग इसे गाते हैं, लेकिन नई पीढ़ी के लोगों को…

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