चारपाई पर नाचते हैं यह घोड़े, चाल को मदमस्त व मनमोहक बनाने पूरा परिवार करता है देखभाल

vagad darshan tufan

जिला मुख्यालय से छह किमी दूर थाणा गांव में काठियावाडी व मारवाड़ी नस्ल के घोड़े, तीन दशक से ढोली परिवार घोड़ों के जरिये कर रहा गुजारा , बादल, तूफान, राजा, शेर, धनराज, बिजली, शहरी तूफान है घोड़ों के नाम डूंगरपुर। महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का नाम हर कोई जानता है। राजाओं के शासनकाल में घोड़ा शानो शौकत की पहचान था। युद्ध से लेकर शुरवीरता में घोड़ों का नाम लिया जाता है। डूंगरपुर जिला मुख्यालय से छह किमी की दूरी पर स्थित थाणा गांव में ढोली परिवार घोड़े के जरिये अपने परिवार…

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