चारपाई पर नाचते हैं यह घोड़े, चाल को मदमस्त व मनमोहक बनाने पूरा परिवार करता है देखभाल

vagad darshan tufan

जिला मुख्यालय से छह किमी दूर थाणा गांव में काठियावाडी व मारवाड़ी नस्ल के घोड़े, तीन दशक से ढोली परिवार घोड़ों के जरिये कर रहा गुजारा , बादल, तूफान, राजा, शेर, धनराज, बिजली, शहरी तूफान है घोड़ों के नाम डूंगरपुर। महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का नाम हर कोई जानता है। राजाओं के शासनकाल में घोड़ा शानो शौकत की पहचान था। युद्ध से लेकर शुरवीरता में घोड़ों का नाम लिया जाता है। डूंगरपुर जिला मुख्यालय से छह किमी की दूरी पर स्थित थाणा गांव में ढोली परिवार घोड़े के जरिये अपने परिवार…

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पायलट बोले, धर्मो के ठेकेदार मंदिर जाते तो क्या बुरा होता!

sachin pilot dungarpur

डूंगरपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि पीएम बेणेश्वर धाम पर भाषण देकर चले गए। मंदिर में हाथ जोड़कर चले जाते तो क्या बुरा होता। यह धर्मो के ठेकेदार बनते है, मंदिर जाना क्यों भूल गए! आखिर जगह का चयन क्यों किया। ​बहुत बड़ा धाम है। लोग शामिल हो जाएगे, इसलिए सभा कर दी। इससे तो खेत में ही सभा कर लेते। यह मंगलवार को चौरासी विधानसभा क्षेत्र के कुआं गांव में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में घमंड का…

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क्या आपने देखा है यह स्कूल, जिसकी दीवारें बोलती है…

डूंगरपुर जिले का हिम्मतपुरा राजकीय प्राथमिक विद्यालय

-टाई पहने, आई कार्ड लटकाए अध्ययन करते हैं विद्यार्थी सरकारी स्कूलों की स्थिति से हर कोई वाकिफ है। यहां कक्षाकक्षों के साथ संसाधनों की कमी झेलनी पड़ती है। राजस्थान के वागड़ क्षेत्र में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल ऐसा भी है जो निजी विद्यालयों को भी मात देता है। इसे देखकर सरकारी स्कूल के प्रति हर किसी की सोच बदल जाती है। इस स्कूल के विद्यार्थी टाई पहने, गले में आई कार्ड लटकाए निजी स्कूलों की तरह अध्ययन करते नजर आते हैं। डूंगरपुर जिले के हिम्मतपुरा राजकीय प्राथमिक विद्यालय की हिम्मत…

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मंजुला रोत सचिन पायलट ग्रुप की, काट रहे एक दूसरे को!

चौरासी विधानसभा

डूंगरपुर। राज्यसभा सांसद हर्षवर्धनसिंह ने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी है। मंजुला रोत सचिन पायलट ग्रुप की है। एक गुट दूसरे गुट को काट रहा है। ऐसी पार्टी को लाकर कोई काम नहीं होने वाला है। भाजपा विकास की राजनीति करती है। जात पात की राजनीति नहीं करती है। भाजपा सामाजिक समरसता वाली पार्टी है। हमारे लिए आप सब एक है। भाजपा काम से मतलब रखती है। मुस्लिम मतदाताओं से कहा कि अबकी बार हमको समर्थन दीजिए। आपके कार्य हम करने के लिए तैयार है। वागड़ का क्षेत्र शांतिपूर्ण है,…

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पांच साल थे आपके, 15 दिन हमारे!, ऐसे पहुंची सीएम

डूंगरपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि पांच साल आपके थे। अब 15 दिन हमारे है। 15 दिन कमल की खेती खिलानी है। अब सरकार वहीं आएगी जो जनता का विकास करेगी। य​ह चौरासी विधानसभा क्षेत्र के चिखली कस्बे में विजय संकल्प सभा में भाजपा प्रत्याशी सुशील कटारा के समर्थन में संबोधित कर रही थी। सीएम ने वागड़ के पारंपरिक आभूषण सांकली, कंदौरा पहना हुआ था। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सेल्फी ली। कार्यकर्ता सीएम से बोलें हम लेते है पूरी गारंटी।… आप भी देखे वीडियो यह भी देखे : ऐसे…

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नीला पानी, बस इस पल का होता है वर्षभर इंतजार…

neelapani fair place

राजेश पटेल, डूंगरपुर। मेला हमारी संस्कृति का हिस्सा है। गांवों में लगने वाले मेले में ग्रामीण संस्कृति का दर्शन होता है। बेणेश्वर व रथोत्सव के बाद नीलापानी मेले की पहचान बरसों से कायम है। परंपराओं पर आधारित यह मेला ऐतिहासिक है। देव दिवाली का यह मेला पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। यहां तक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इस पर सवाल पूछा जा चुका है। वर्षभर साधु इस नीलापानी मेले के आने का इंतजार करते हैं। कई साधु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। यहां चौदस को कुंड में स्नान के लिए…

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कभी गोकुल-मथुरा कहलाती थी वागड़ की यह जगह…

राजेश पटेल, डूंगरपुर। जब आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का नाम आता है तो गोकुल व मथुरा जेहन में आ जाता है। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा की प्रतिमा विराजित होती है, लेकिन वागड़ में एक गांव ऐसा है जिसके नाम में ही भगवान श्याम बिराजते हैं। डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा पंचायत समिति में स्थित नवलश्याम गांव वर्तमान में राधाकृष्ण मंदिर से पहचाना जाता है। गांव के राधाकृष्ण मंदिर काशी के कारीगरों की मदद से तैयार किया है। इस मंदिर को गोकुल, मथुरा की तरह हुबहु बनाने का प्रयास किया गया…

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जिसने ये नहीं खाया, उसकी जिदंगी किस काम की…

डूंगरपुर। मेहंदी रंग लाती है, सूख जाने के बाद। चना खाने की याद आती है, निकल जाने के बाद। फूल है गुलाब का, कली किस काम की, जिसने चने नहीं खाये, उसकी जिंदगी किस काम की। तेल के पीपों को काटकर बनाए गए डिब्बों पर यह पंक्तियां नजर आती है। इन पक्तियों के साथ नवल भाई का चना मसाला का व्यापार बरसों से चल रहा है। इनकी अपनी चलती फिरती दुकान है। नवलभाई चने वाले को डूंगरपुर शहर के बुजुर्ग, अधेड़ समेत ग्रामीण अंचल में हर कोई जानता है। यह…

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दिवाली पर कैसे चेहरे पर आती है मुस्कुराहट!

वागड़ में मेरियू की परंपरा नववर्ष यानि गोवर्धन पूजा के दिन तड़के पांच बजे से शुरू हो जाती है। यहां बच्चों की तरफ से आल दिवारी, काल दिवारी, पमणे दाड़े घोर दिवारी, मेरियू..मेरियू..मेरियू का संबोधन किया जाता है। इससे आगे की पक्तियां सुनना भी रोचक होता है। बच्चों द्वारा संबोधन के पास मेरियू में तेल पुरवने के साथ सिक्कों का आना ही चेहरे पर मुस्कुराहट ला देता है। आपके लिए हम पुरा वीडियो लेकर आए है।

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जाने क्या है थाणा की रामणा रस्म…

वागड़ अंचल में दीपावली पर्व पर कई परंपरा व रीति​ रिवाज है। डूंगरपुर जिला मुख्यालय से पांच किमी की दूरी पर स्थित है थाणा गांव। कभी इस गांव को शाला शाह थाणा कहा जाता था। इस गांव में दीपावली पर्व अनूठे तरीके से मनाया जाता है। यहां गन्ने और पताशे बांटकर दिवाली मनाई जाती है। जिसे स्थानीय बोली में रामणा कहते हैं। बताते हैं कि गांव के चौराहे पर सभी जाति धर्म के लोग एकत्रित होते हैं। किसान अपनी अपनी इच्छानुसार गन्ने की भारियो को रखते हैं। यहां गन्ने के…

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