नीला पानी, बस इस पल का होता है वर्षभर इंतजार…

neelapani fair place

राजेश पटेल, डूंगरपुर। मेला हमारी संस्कृति का हिस्सा है। गांवों में लगने वाले मेले में ग्रामीण संस्कृति का दर्शन होता है। बेणेश्वर व रथोत्सव के बाद नीलापानी मेले की पहचान बरसों से कायम है। परंपराओं पर आधारित यह मेला ऐतिहासिक है। देव दिवाली का यह मेला पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। यहां तक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इस पर सवाल पूछा जा चुका है। वर्षभर साधु इस नीलापानी मेले के आने का इंतजार करते हैं। कई साधु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। यहां चौदस को कुंड में स्नान के लिए…

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यहां छलका दूध का कुंभ, ओर बन गया सामौर सेठ का मंदिर

kheda samor

वागड़ में यहां भगवान विष्णु कहलाते हैं सामौर सेठ… महिपालसिंह, डूंगरपुर। वागड़ में हर गांव का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है। हर गांव में आपको मंदिर मिल जाएंगे, हर मंदिर के पीछे किवंदती मिलती है। तभी वागड़ धर्म की नगरी कहलाती है। इसी वागड़ के डूंगरपुर जिले में एक गांव ऐसा भी हैं जहां भगवान विष्णु की प्रतिमा सामौर सेठ कहलाती हैं। गांव भी सामौर नगरी के नाम से विख्यात है। यह जगह आसपुर पंचायत समिति का खेडासामौर गांव है। किवंदती है कि करीब 700 वर्ष पूर्व इस गांव में…

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