डूंगरपुर का चपड़ा, इसकी स्वादिष्टता ही पीढ़ियों से पहचान

manak chowk dungarpur

डूंगरपुर से कार्तिक शर्मा की नजर से : डूंगरपुर रियासत कालीन शहर है, इस शहर में कई खुबियां है। इसी शहर में माणक चौक के पास एक दुकान है, जिसकी पहचान लि​मड़े वाली दुकान से है। लिमड़े मतलब कभी यहां दुकान के पास नीम का पेड़ हुआ करता था। दिखने में सामान्य है, पर इस दुकान की पीढ़ियों से पहचान बनी हुई है। अब इसको इस​लिए खास तौर पर याद किया जाता है, क्योंकि वर्षभर में सिर्फ नौ दिन यहां चपड़ा तैयार किया जाता है। नाम थोड़ा अटपटा जरूर है लेकिन…

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वागड़ के इस मंदिर में बिना ब्याज के मिलता था पैसा..

wagaddarshan

आज हम आपको ऐसे वागड़ क्षेत्र के ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं कि जिसे भगवान गणेशजी संकटमोचन बनकर भक्तों की आर्थिक परेशानियां दूर करते थे। बस इसके लिए आपको भगवान के नाम चिट्ठी लिखनी होती थी। दूसरे दिन नियत समय पर लाल थैली में राशि मिल जाती थी। चाहे कितनी ही राशि क्यों ना हो। यह राशि बिना ब्याज के मिलती थी। राशि को नियत समय पर लौटाने का भी जिक्र चिट्ठी में लिखना होता था। इसके लिए गवाह की जरूरत भी नहीं होती थी। जहां बिना…

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