पायलट बोले, धर्मो के ठेकेदार मंदिर जाते तो क्या बुरा होता!

sachin pilot dungarpur

डूंगरपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि पीएम बेणेश्वर धाम पर भाषण देकर चले गए। मंदिर में हाथ जोड़कर चले जाते तो क्या बुरा होता। यह धर्मो के ठेकेदार बनते है, मंदिर जाना क्यों भूल गए! आखिर जगह का चयन क्यों किया। ​बहुत बड़ा धाम है। लोग शामिल हो जाएगे, इसलिए सभा कर दी। इससे तो खेत में ही सभा कर लेते। यह मंगलवार को चौरासी विधानसभा क्षेत्र के कुआं गांव में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में घमंड का…

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क्या आपने देखा है यह स्कूल, जिसकी दीवारें बोलती है…

डूंगरपुर जिले का हिम्मतपुरा राजकीय प्राथमिक विद्यालय

-टाई पहने, आई कार्ड लटकाए अध्ययन करते हैं विद्यार्थी सरकारी स्कूलों की स्थिति से हर कोई वाकिफ है। यहां कक्षाकक्षों के साथ संसाधनों की कमी झेलनी पड़ती है। राजस्थान के वागड़ क्षेत्र में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल ऐसा भी है जो निजी विद्यालयों को भी मात देता है। इसे देखकर सरकारी स्कूल के प्रति हर किसी की सोच बदल जाती है। इस स्कूल के विद्यार्थी टाई पहने, गले में आई कार्ड लटकाए निजी स्कूलों की तरह अध्ययन करते नजर आते हैं। डूंगरपुर जिले के हिम्मतपुरा राजकीय प्राथमिक विद्यालय की हिम्मत…

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पांच साल थे आपके, 15 दिन हमारे!, ऐसे पहुंची सीएम

डूंगरपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि पांच साल आपके थे। अब 15 दिन हमारे है। 15 दिन कमल की खेती खिलानी है। अब सरकार वहीं आएगी जो जनता का विकास करेगी। य​ह चौरासी विधानसभा क्षेत्र के चिखली कस्बे में विजय संकल्प सभा में भाजपा प्रत्याशी सुशील कटारा के समर्थन में संबोधित कर रही थी। सीएम ने वागड़ के पारंपरिक आभूषण सांकली, कंदौरा पहना हुआ था। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सेल्फी ली। कार्यकर्ता सीएम से बोलें हम लेते है पूरी गारंटी।… आप भी देखे वीडियो यह भी देखे : ऐसे…

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नीला पानी, बस इस पल का होता है वर्षभर इंतजार…

neelapani fair place

राजेश पटेल, डूंगरपुर। मेला हमारी संस्कृति का हिस्सा है। गांवों में लगने वाले मेले में ग्रामीण संस्कृति का दर्शन होता है। बेणेश्वर व रथोत्सव के बाद नीलापानी मेले की पहचान बरसों से कायम है। परंपराओं पर आधारित यह मेला ऐतिहासिक है। देव दिवाली का यह मेला पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। यहां तक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इस पर सवाल पूछा जा चुका है। वर्षभर साधु इस नीलापानी मेले के आने का इंतजार करते हैं। कई साधु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। यहां चौदस को कुंड में स्नान के लिए…

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कभी गोकुल-मथुरा कहलाती थी वागड़ की यह जगह…

राजेश पटेल, डूंगरपुर। जब आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का नाम आता है तो गोकुल व मथुरा जेहन में आ जाता है। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा की प्रतिमा विराजित होती है, लेकिन वागड़ में एक गांव ऐसा है जिसके नाम में ही भगवान श्याम बिराजते हैं। डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा पंचायत समिति में स्थित नवलश्याम गांव वर्तमान में राधाकृष्ण मंदिर से पहचाना जाता है। गांव के राधाकृष्ण मंदिर काशी के कारीगरों की मदद से तैयार किया है। इस मंदिर को गोकुल, मथुरा की तरह हुबहु बनाने का प्रयास किया गया…

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सात बैलगाडी टूटी, फिर स्थापित कर दी प्रतिमा

डूंगरपुर जिले का प्रसिद्ध मांडविया हनुमान मंदिर

राजेश पटेल व विशाल कलाल की संयुक्त रिपोर्ट : डूंगरपुर जिले का चमत्कारिक मांडविया हनुमान मंदिर आस्था का ऐसा परम धाम है, यहां भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होती है। जिला मुख्यालय से 26 किमी की दूरी पर स्थित इस मंदिर में हर शनिवार को श्रद्धालुओं का मेला लगता है। सिर्फ डूंगरपुर—बांसवाड़ा ही नहीं, विभिन्न स्थानों से लोग दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी किवदंती यह है कि देवली माता टेम्बा के पास किसी आदिवासी समाज के व्यक्ति को स्वप्न आया। घटिया घरा स्थित क्षेत्र में हनुमानजी…

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150 परिवार में हर घर से एक व्यक्ति विदेश..

डूंगरपुर। जीवन में हर कोई एक बार विदेश जाने की चाह रखता है। विदेश में रोजगार मिलना भी कोई आसान काम नहीं है। पहली बार विदेश जाने वाले युवाओ को रोजगार के लिए कई दिन तक भटकना पड़ता है। डूंगरपुर जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां 150 परिवारों में हर घर से एक व्यक्ति रोजगार की चाह में विदेश रहता है। जिला मुख्यालय से सात किमी की दूरी पर स्थित मोकरवाड़ा गांव के युवा कतर, कुवैत, इजरायल, बहरीन, इराक आदि देशों में कार्य कर रहे हैं। इस गांव…

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एक हजार वर्ष पुरानी है मोड़ी माता की प्रतिमा

विशाल कलाल। वागड़ में ऐसे मंदिर व प्रतिमाएं है जो अब तक गुमनानी में है। जिनके बारे में श्रद्धालु अब तक अनभिज्ञ है। जो एक हजार वर्ष से अधिक पुराना है। बहुत कम लोग ही इन चमत्कारिक प्रतिमाओं के बारे में जानते हैं। डूंगरपुर में आंतरी—सुराता मार्ग पर स्थित मोडी माता का मंदिर भी कुछ ऐसा ही है। जहां दर्शन करने से असाध्य बीमारियां दूर हो जाती है। लोगों के संकट टल जाते है। इस प्रतिमा के चौखट तक पहुंचने पर हर समस्या का समाधान निकलने की बात बुजुर्ग बताते…

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क्या जानते है आप, डूंगरपुर में है लंदन…

लंदन इग्लैंड की राजधानी है। सबसे अधिक आबादी वाला खूबसूरत शहर। गगनचुंबी इमारते, टावर आॅफ लंदन, लंदन अंडरग्राउंड यहां की शान है। पर, किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि डूंगरपुर में भी लंदन हो सकता है। लंदन वाले सोचते होंगे कि डूंगरपुर ने हमारे शहर को कैद कर लिया है। बनकोडा—आसपुर मार्ग पर मुख्य मार्ग पर एक गांव है नरणिया। जिसे लंदन के नाम से जाना जाता है। 1700 की आबादी वाला गांव है। लंदन जैसी ऐसी कोई बात नहीं है। गांव के साइन बोर्ड पर लंदन जरूर नजर…

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जिसने ये नहीं खाया, उसकी जिदंगी किस काम की…

डूंगरपुर। मेहंदी रंग लाती है, सूख जाने के बाद। चना खाने की याद आती है, निकल जाने के बाद। फूल है गुलाब का, कली किस काम की, जिसने चने नहीं खाये, उसकी जिंदगी किस काम की। तेल के पीपों को काटकर बनाए गए डिब्बों पर यह पंक्तियां नजर आती है। इन पक्तियों के साथ नवल भाई का चना मसाला का व्यापार बरसों से चल रहा है। इनकी अपनी चलती फिरती दुकान है। नवलभाई चने वाले को डूंगरपुर शहर के बुजुर्ग, अधेड़ समेत ग्रामीण अंचल में हर कोई जानता है। यह…

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